स्क्रीन टाइम बच्चों को मोबाइल से दूर करना नहीं, उसके सही इस्तेमाल की आदत डालना जरूरी

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स्क्रीन टाइम
बच्चों को मोबाइल से दूर करना नहीं, उसके सही इस्तेमाल की आदत डालना जरूरी
आज मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हमारी दिनचर्या का कोई न कोई हिस्सा मोबाइल से जुड़ा रहता है। बच्चों की दुनिया भी इससे अलग नहीं है। आज लगभग हर घर में फोन मौजूद है और बच्चे ऐसे माहौल में बड़े हो रहे हैं, जहां मोबाइल उनकी पहुंच में शुरू से ही है।
यही वजह है कि बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता अक्सर चिंतित रहते हैं। लेकिन सबसे पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि मोबाइल आज के समय की वास्तविकता है। इससे पूरी तरह दूर रहना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि हमारे कामकाज और सामाजिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा इससे जुड़ा हुआ है। ऐसे में जरूरत मोबाइल को पूरी तरह बंद करने की नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल को स्वस्थ और संतुलित सीमा में रखने की है।
शुरुआत खुद से करें
बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को सीमित करने की शुरुआत माता-पिता को खुद से करनी चाहिए। यदि बड़े खुद हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे, तो बच्चों से मोबाइल दूर रखने की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
इसके लिए परिवार में कुछ ‘नो फोन जोन’ बनाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय किसी भी सदस्य को मोबाइल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसी तरह बेडरूम, बच्चों का स्टडी रूम, रसोई, बाथरूम, बालकनी या घर के अन्य निर्धारित स्थानों को फोन-फ्री रखा जा सकता है।
घर में बनाएं एक ‘फोन जोन’
इस नियम को और आसान बनाने के लिए घर में एक निश्चित स्थान को ‘फोन जोन’ बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, घर की लॉबी या कोई सामान्य स्थान ऐसा हो, जहां परिवार के सभी सदस्य मनोरंजन के लिए मोबाइल इस्तेमाल करें।
इसका फायदा यह होगा कि मोबाइल पूरे घर में हर समय हाथ में लेकर घूमने की आदत कम होगी। बच्चे भी देखेंगे कि मोबाइल इस्तेमाल करने के लिए एक निश्चित स्थान और समय है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नियम केवल बच्चों पर नहीं, बल्कि मम्मी-पापा, दादा-दादी और घर के सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
फोन को बुरी चीज न बनाएं
मोबाइल को लेकर बच्चों के मन में अत्यधिक डर या नकारात्मक भावना पैदा करना भी सही तरीका नहीं है। यदि हम फोन को किसी बहुत खतरनाक या पूरी तरह बुरी चीज की तरह पेश करेंगे, तो बच्चों की उसके प्रति जिज्ञासा और आकर्षण बढ़ सकता है।
इसलिए जरूरत इस बात की है कि बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल या किसी डिवाइस के इस्तेमाल से रोका जाए, लेकिन मोबाइल को ही बुरा न बताया जाए। बच्चों को धीरे-धीरे यह समझाना जरूरी है कि मोबाइल एक साधन है और उसका इस्तेमाल हमारी जरूरत के अनुसार होना चाहिए।
बच्चों को बेहतर विकल्प दें
कई बार बच्चे सिर्फ बोरियत के कारण मोबाइल उठाते हैं। ऐसे में यदि उनके पास दूसरे बेहतर विकल्प मौजूद हों, तो मोबाइल पर निर्भरता कम की जा सकती है।
माता-पिता बच्चों के साथ बाहर खेल सकते हैं, बोर्ड गेम खेल सकते हैं, किताब पढ़ सकते हैं या कुछ समय केवल बातचीत में बिता सकते हैं। धीरे-धीरे जब बच्चों को परिवार के साथ समय बिताने में आनंद मिलने लगेगा, तो मोबाइल उनकी पहली पसंद नहीं रहेगा।
लक्ष्य मोबाइल से दूरी नहीं, समझदारी है
मोबाइल अब हमारी जिंदगी का स्थायी हिस्सा हैं और आज के बच्चे इन्हीं के साथ बड़े होंगे। इसलिए हमारा लक्ष्य बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखना नहीं, बल्कि उन्हें मोबाइल का सही और समझदारी से इस्तेमाल करना सिखाना होना चाहिए। जब माता-पिता खुद उदाहरण बनते हैं, मोबाइल को लेकर संतुलित रवैया अपनाते हैं और बच्चों को समय बिताने के बेहतर विकल्प देते हैं, तो बच्चे भी सीखते हैं कि मोबाइल को अपने नियंत्रण में कैसे रखा जाए, न कि खुद मोबाइल के नियंत्रण में कैसे आ जाएं।
संदेश स्पष्ट है मोबाइल बंद करना समाधान नहीं है,मोबाइल के इस्तेमाल की सही आदत डालना समाधान है।
घर में एक ‘फोन जोन’ बनाएं, कुछ जगहों को ‘नो फोन जोन’ रखें और सबसे पहले इसकी शुरुआत खुद से करें।

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